बेटी भारतवर्ष की
पिता की सच्ची शान है, बेटी !
नानी-नाना का मान है, बेटी !
दादी-दादा की जान है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !!
घर का बिखरा सामान है, बेटी !
घरवालों का सम्मान है, बेटी !
सखियों के सुर की तान है, बेटी !
हर बेटे से महान है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
निज तीर सहेज, कमान है, बेटी !
बढ़ने में वायु-यान है, बेटी !
युद्ध श्रेत्र, बलवान है, बेटी !
विधाता का वरदान है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
देवी मां का गुणगान है, बेटी !
हर चेहरे की मुस्कान है, बेटी !
मेरे शब्दों का गान है, बेटी !
मेरे गीतों के प्राण है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
प्रतिकूल समय, संकट की घड़ी के,
सम्मुख एक व्यवधान है, बेटी !
बस एक कमी, उसके अंदर है !
कुछ क्षण की ही, मेहमान है बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
सच कह ही दूं, अब तुम सब से ?
"वृन्दान्त" कथन, क्या मानोगे ?
मुझको तो लगता, सदा यही !
इस धरा पे, स्वयं 'भगवान' है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
भारतवर्ष की आन है, बेटी !
✍️ आचार्य "वृन्दान्त" ✍️






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