माँ का मूल्य
एक अनमोल रत्न
मां, तुझे प्रणाम
नमस्कार! व्रन्दावलि के पाठकों,
जीवन के सफर में असंख्य हर्षों और संघर्षों के बाद, हमें एक ऐसे अमूल्यवान व्यक्तित्व के बारे में समझने का समय आता है, जिसका वास्तविक मूल्य हम कभी नहीं माप सकते -
"मां का मूल्य"
यह एक विशेष लेख है, जिसमें हम माँ की महत्ता और उनकी पवित्रता को आकार देने का प्रयास करेंगे।
मां - ईश्वर का उपहार
मां - एक शब्द जो सबको प्यार और संबंधों की याद दिला देता है। यह एक ऐसी शक्ति है जो हमें जन्म देती है, हमें प्यार करती है, हमें पालती है और हमारे जीवन भर साथ देती है। माँ जीवन का सबसे बड़ा उपहार है जो ईश्वर द्वारा हमें दिया जाता है।
मां के स्नेह की असीमित सीमाएं होती हैं, जो किसी भी शब्द में व्यक्त नहीं की जा सकती हैं। उनका वात्सल्य निःस्वार्थ होता है और उनकी ममता अपार होती है। माँ का एक आंसू भी हमारे लिए अमृत के समान होता है, जो हमें शक्ति और संवेदनशीलता प्रदान करता है।
उनके हाथों में हमेशा प्रेम और आशीर्वाद होता है। उनके स्पर्श से हमें सुकून मिलता है, जैसे कि उनकी गोद में सोने से हमेशा आनंद आता है। उनके हाथों की मेहंदी हमें सौंदर्य और सौभाग्य की आशा देती है। उनके हाथ हमारे खान-पान को स्वादिष्टता से भर देते हैं और हमें आनंद प्रदान करते हैं।
मां - एक अद्वितीय मार्गदर्शक
मां के हाथों में छिपी हर लकीर हमें विश्वास दिलाती है कि उनकी ममता हमारे लिए हमेशा सुरक्षित है।
उनके हाथ हमें समर्पण की भावना सिखाते हैं और हमें सही मार्ग दिखाते हैं।
उनकी मांग में छुपी माथापट्टी हमारी शक्ति का प्रतीक होती है और हमें आत्मविश्वास देती है।
मां के हाथों में हमारी ख्वाहिशों की पूर्ति होती है। जब हम उनके हाथ पकड़ते हैं, तो हमें विश्वास होता है कि हम जीवन की सारी मुश्किलों को पार कर सकते हैं।
मां - एक अद्भुत योद्धा
मां के हाथों से हमें संजीवनी की तरह शक्ति मिलती है। जैसे- हनुमानजी ने संजीवनी बूटी से लक्ष्मण को जीवित किया था, वैसे ही मां के आलिंगन से हमें नई ऊर्जा और उत्साह मिलता है। उनके प्यार और संबल के आदान-प्रदान से हम अपार शक्ति प्राप्त करते हैं।
माँ के हाथों का स्पर्श हमें रोगों से मुक्ति दिलाता है। माँ के हाथों में हमारी ज़िन्दगी की सभी समस्याओं का हल छिपा होता है।
वृन्दावलि के पाठकों,
वास्तविकता में व्रन्दावलि हमारी संस्कृतियों का ही एक काव्यिक संग्रह है, और मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप इस काव्य रचना को पढ़कर मां के मूल्य को अवश्य समझने का प्रयास करें।
अब मैं "मां का मूल्य : एक अनमोल रत्न" शीर्षक के साथ आपके लिए एक सुंदर कविता लिखता हूँ।
माँ का मूल्य : एक अनमोल रत्न
मां, एक छोटा सा शब्द, स्वयं ही शब्दकोष है,
"वृन्दान्त" मूल्य निर्धारण में, कहीं भला कोई दोष है ?
मां का मूल्य…….
अनन्त आकाश की ऊंचाई,
से भी ज़्यादा है,
असीमित सागर की गहराई,
से भी ज़्यादा है|
कड़ाके की ठण्डक में रज़ाई,
से भी ज़्यादा है,
तपती हुई गर्मी में ठण्डाई,
से भी ज़्यादा है||
|१|
मां, एक छोटा सा शब्द…
मिट्टी में बीजों की बुआई,
से भी ज़्यादा है,
फसलों में पड़ती हुई दवाई,
से भी ज़्यादा है|
निर्धन की पहली कमाई,
से भी ज़्यादा है,
राखी से वंचित हर कलाई,
से भी ज़्यादा है||
|२|
मां, एक छोटा सा शब्द…
ज़रूरत पे गरीबों की भलाई,
से भी ज़्यादा है,
हिंसा कर हड़पने की बुराई,
से भी ज़्यादा है|
सब छीनकर के की गई भरपाई,
से भी ज़्यादा है,
बेपरदा के पर्दों की तुरपाई,
से भी ज़्यादा है||
|३|
मां, एक छोटा सा शब्द…
नील नदी, मां गंगा की लम्बाई,
से भी ज़्यादा है,
जापान देश के सूमों की मोटाई,
से भी ज़्यादा है|
रूस और यूक्रेन की लड़ाई,
से भी ज़्यादा है,
मुंह फाड़ खड़ी है जो बैरन मंहगाई,
से भी ज़्यादा है||
|४|
मां, एक छोटा सा शब्द…
श्री राम पर हनुमान की मिताई,
से भी ज़्यादा है,
श्री राम संग सीता मां की सगाई,
से भी ज़्यादा है|
श्री राम जी की रावन पर विजयाई,
से भी ज़्यादा है,
श्री राम ने जो मर्यादा सिखलाई,
से भी ज़्यादा है||
|५|
मां, एक छोटा सा शब्द…
बेटे की आई. ए. एस. की पढ़ाई,
से भी ज़्यादा है,
बेटी की डोली, बरात, शहनाई,
से भी ज़्यादा है|
पत्नी के प्रेम, समर्पण की सच्चाई,
से भी ज़्यादा है,
भाई बहनों की स्नेहिल अंगड़ाई,
से भी ज़्यादा है||
|६|
मां, एक छोटा सा शब्द…
बाबा के पैरों में पड़ी बिवाई,
से भी ज़्यादा है,
बाबा की कुल जोड़ी पाई-पाई,
से भी ज़्यादा है|
बाबा ने फल की जो बगिया बनाई,
से भी ज़्यादा है,
बाबा से सबने पाई, इस अंगनाई,
से भी ज़्यादा है||
|७|
मां, एक छोटा सा शब्द...
मॉं, एक छोटा सा शब्द, स्वयं में ही एक,
शब्दकोष है|
इसके मूल्य का, मात्र एक अतिसूक्ष्म, अंश,
पद्मकोष है||
✍️ आचार्य "वृन्दान्त" ✍️
निष्कर्षत:
इस कविता के माध्यम से,
हम यह प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहे हैं कि मां हमारे जीवन का आधार है, हमारी रक्षा करती है और हमें प्रेम से आदर्श बनाने में सहायता प्रदान करती है। इसके साथ ही, यह कविता मां की अमूल्यता को प्रकट करती है।
इस कविता से हमें मां के प्रति सम्मान और प्रेम की महत्वपूर्णता का आदर्श मिलता है। यह हमें याद दिलाती है कि हमें हमारी मातृभाषा के माध्यम से अपनी मातृभक्ति को व्यक्त करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।







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