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कभी जाओ अयोध्या तुम | सर्वश्रेष्ठ राम भजन | श्री राम मंदिर अयोध्या

  कभी जाओ अयोध्या तुम सर्वश्रेष्ठ राम भजन श्री राम मंदिर अयोध्या को सादर प्रेषित ॥ जय श्री राम ॥ कभी जाओ , अयोध्या तुम ; मेरी पाती भी ले जाना ! मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !! ये कोदण्डधारी से कहना ; मुझे कब तक बिसारोगे ! मैं कण्टक , राह का बन जाऊं ; प्रभु तब तो निहारोगे !! हरि के नाम से अर्जित ; मेरी थाती भी ले जाना ! मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !! कभी जाओ , अयोध्या तुम … जो उनसे , भेंट हो तो ; क्या मेरे ये प्रश्न पूछोगे ? युगल के चरण-कमलों को ; मेरे साथी क्या छू लोगे ? मेरे कुल के दीपक संग ; मेरी बाती भी ले जाना ! मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !! कभी जाओ , अयोध्या तुम … हैं लाखों स्वप्न , नैनों में ; सानुज सिया-राम आऐंगे ! पवनसुत साथ हैं उनके ; सदा ही काम आएंगे !! जहां हैं ये सभी बसते ; मेरी छाती भी ले जाना ! मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !! कभी जाओ , अयोध्या तुम … मिले जो पुन्य , सत्कर्मों के ; वे ही साथ जाएंगे ! जो मानवता के प्रतिबिम्ब हैं ; वे ही फल हाथ आऐंगे !! पिता की सीख , लोरी मॉं ; मेरी गाती ,...

कभी जाओ अयोध्या तुम | सर्वश्रेष्ठ राम भजन | श्री राम मंदिर अयोध्या

 

कभी जाओ अयोध्या तुम

सर्वश्रेष्ठ राम भजन

श्री राम मंदिर अयोध्या

को

सादर प्रेषित

कभी जाओ अयोध्या तुम | सर्वश्रेष्ठ राम भजन | श्री राम मंदिर अयोध्या


जय श्री राम

कभी जाओ , अयोध्या तुम ; मेरी पाती भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


ये कोदण्डधारी से कहना ; मुझे कब तक बिसारोगे !

मैं कण्टक , राह का बन जाऊं ; प्रभु तब तो निहारोगे !!

हरि के नाम से अर्जित ; मेरी थाती भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


कभी जाओ , अयोध्या तुम …


जो उनसे , भेंट हो तो ; क्या मेरे ये प्रश्न पूछोगे ?

युगल के चरण-कमलों को ; मेरे साथी क्या छू लोगे ?

मेरे कुल के दीपक संग ; मेरी बाती भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


कभी जाओ , अयोध्या तुम …


हैं लाखों स्वप्न , नैनों में ; सानुज सिया-राम आऐंगे !

पवनसुत साथ हैं उनके ; सदा ही काम आएंगे !!

जहां हैं ये सभी बसते ; मेरी छाती भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


कभी जाओ , अयोध्या तुम …


मिले जो पुन्य , सत्कर्मों के ; वे ही साथ जाएंगे !

जो मानवता के प्रतिबिम्ब हैं ; वे ही फल हाथ आऐंगे !!

पिता की सीख , लोरी मॉं ; मेरी गाती , भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


कभी जाओ , अयोध्या तुम …


मेरे मन की व्यथाओं को ; मेरे आंसू ही बोलेंगे !

मेरे सौभाग्य द्वारों को ; मेरे राघव ही खोलेंगे !!

सनातन की प्रथा है मेरी ; परिपाटी , भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


कभी जाओ , अयोध्या तुम ; मेरी पाती भी ले जाना !

मैं पापी हूं , मुझे छोड़ो ; मेरी माटी ही ले जाना !!


जय श्री राम

कभी जाओ अयोध्या तुम | सर्वश्रेष्ठ राम भजन | श्री राम मंदिर अयोध्या

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